हमारा कर्तव्य है कि हम अपने स्वतंत्रता सेनानियों के योगदान को याद रखें – डॉ. चौबे

शासकीय नर्मदा महाविद्यालय में आज उच्च शिक्षा विभाग मध्यप्रदेश शासन भोपाल द्वारा प्रायोजित कार्यक्रम -“आजादी का अमृत महोत्सव”  दांडी मार्च की वर्षगांठ के अवसर पर भारतीय स्वतंत्रता संग्राम की 75 वीं वर्षगांठ विषय पर कार्यक्रम का शुभारंभ किया गया | कार्यक्रम के पहले चरण में माननीय प्रधानमंत्री जी का संबोधन का सीधा प्रसारण हुआ माननीय प्रधानमंत्री जी ने विद्यार्थियों  से कहा  कि वे देश के 75 घटनाओं को इन दिनों में रेखांकित करें और साथ ही साथ 75 समूह बनाकर देश की स्वतंत्रता संग्राम की घटनाओं को चिन्हित करें ताकि आने वाली पीढ़ी के लिए देश का इतिहास सुरक्षित हो सके।

कार्यक्रम के दूसरे चरण में गांधी जी और दांडी यात्रा पर केंद्रित संगोष्ठी का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का प्रारंभ प्राचार्य डॉ ओ एन चौबे के शुभकामना संदेश से हुआ उन्होंने अपने ओजस्वी वक्तव्य में कहा कि हमारा सौभाग्य है कि हम आजाद भारत में पैदा हुए इसलिए हमारा कर्तव्य है कि हम अपने स्वतंत्रता सेनानियों के योगदान को याद रखें यही हमारी सच्ची श्रद्धांजलि होगी। डॉ बी सी जोशी ने अपने संबोधन में कहा कि  देश का गौरवशाली इतिहास हमें नए भारत के निर्माण की प्रेरणा देता है ।वाणिज्य विभाग अध्यक्ष डॉक्टर एस सी हर्णे स्वतंत्रता संग्राम की प्रमुख घटनाओं पर प्रकाश डालते हुए कहा कि मेक इन इंडिया अभियान से आत्मनिर्भर बनने के द्वार खुलते हैं कार्यक्रम की समन्वयक डॉ हंसा व्यास ने विषय प्रवर्तन करते हुए स्थानीय स्वतंत्रता सेनानियों के योगदान पर प्रकाश डाला उन्होंने बताया कि दांडी यात्रा राष्ट्रीय धरातल पर सामाजिक एकता सामाजिक संगठन की प्रतीक है वह संदेश देती है कि एकता से ही देश का विकास और सुरक्षा संभव है डॉक्टर कल्पना विश्वास ने अपने व्याख्यान में महात्मा गांधी के योगदान को समझाते हुए दांडी मार्च पर विस्तृत प्रकाश डाला और वर्तमान में उसकी उपयोगिता को संदर्भित किया।

छात्र देवांश बैरागी ने देश का सबसे गौरवशाली समय 1857 से 1947 तक  स्वर्ण काल के रूप में हमारी स्मृतियों में होना चाहिए। साथ ही शस्त्र बल के सहारे नहीं बल्कि आत्म बल से आजादी की लड़ाई जीती गई है गांधी ने देश को पश्चिमीकरण के पिंजरे से निकालकर संस्कृति की ओर बढ़ने का आत्मविश्वास दिया ।ओजस्वी वक्तव्य में छात्र गौरव बरखने ने स्वरचित कविताओं के माध्यम से युवाओं को स्वयं की ताकत पहचानने पर बल दिया और उन्होंने कहा कि हमें खुद दिशा और मानक तय करने होंगे कि देश को किस ओर ले जाने की आवश्यकता है युवा शक्ति को अपना दायित्व निर्वहन करने का समय आ गया है।

छात्रों में उमेश सरैया, भोला बानिया और लाभांश तिवारी  अपनी विचार अभिव्यक्ति की। कार्यक्रम का संचालन डॉ अंजना यादव और आभार डॉ प्रीति उदयपुरे ने व्यक्त किया ।

कार्यक्रम में डॉ आशा ठाकुर, डॉ ममता गर्ग, डॉ.राजेश दीवान, डॉ.राजीव शर्मा, डॉ. दिनेश श्रीवास्तव, डॉ. सरोज जावलकर, डॉ. अर्पणा श्रीवास्तव सक्रिय रुप से उपस्थित रहे। अत्यधिक संख्या में छात्र छात्राओं की सक्रिय भागीदारी बनी रही।