पुस्तक आम आदमी की जीवन यात्रा का जीवंत दस्तावेज होती है: डॉ. शिवशंकर मिश्र

साहित्य, कला और संस्कृति सिर्फ अभिजात्य वर्ग के बीच समृद्ध नहीं होती, बल्कि वह छोटे-छोटे कस्बों में पल्लवित पुष्पित होती है ,यदि इस तथ्य को समझना है तो आप ‘एक कम साठ राजुरकर राज” कृति का अध्ययन कीजिए आप स्वतः समझ जाएंगे कि कैसे एक सुदूर अंचल के गांव गोधनी से निकल कर राजधानी तक का सफर तय करते हुए राजुरकर राज ने अपनी जीवन यात्रा को इस मुकाम तक पहुंचाया है। यह कहना था साहित्यकार और टैगोर विश्वविद्यालय के कुलाधिपति संतोष चैबे का, जो दुष्यंत कुमार स्मारक पांडुलिपि संग्रहालय में राज्य प्रशासनिक सेवा से सेवानिवृत्त रामराव वामनकर की सद्य प्रकाशित कृति के लोकार्पण अवसर पर मुख्य अतिथि के रूप में अपना उद्धवोधन दे रहे थे। इस लोकार्पण कार्यक्रम में विशिष्ट अतिथि हिंदी बघेली के सुप्रसिद्ध साहित्यकार डॉ. शिवशंकर मिश्र ‘सरस” ने इस पुस्तक को एक आम आदमी की खास जीवन यात्रा का जीवंत दस्तावेज बताया।

रामराव वामनकर ने इस कृति के सृजन से जुड़े अनेक रोचक किस्से उपस्थित लोगों के साथ साझा किए। कृति पर चर्चा में भाग लेते हुए समीक्षक घनश्याम मैथिल ‘अमृत‘‘ ने इस कृति को हिंदी साहित्य जगत के लिए महत्वपूर्ण भेंट बताते हुए कहा कि यह इस कृति के नायक सिर्फ राजुरकर राज का जीवन वृत ही नहीं है, अपितु उनकी बचपन से लेकर अभी तक कि जुड़ी यात्रा से जुड़े सैकड़ों महत्वपूर्ण व्यक्तियों एवं स्थानों के बारे में भी हमें बहुत कुछ नवीन जानकारी उपलब्ध कराती है। कार्यक्रम का संचालन डॉ. अरविंद सोनी ने किया। कार्यक्रम में सीमा रानी ,कांता रॉय ,युगेश शर्मा ,मुकेश वर्मा ,नरेंद्र दीपक ,अशोक निर्मल ,विपिन बिहारी वाजपेई ,जगदीश किंजल्क, मुकेश वर्मा, बलराम गुमास्ता, विमल भंडारी सहित अनेक साहित्यकार एवं गणमान्य नागरिक उपस्थित थे।