सूर्य ग्रहण पर 148 साल बाद ये अद्भुत संयोग

श्री आकाश शास्त्री (ज्योतिषाचार्य)

10 जून को इस वर्ष का पहला सूर्य ग्रहण लगने वाला है। हालांकि ये भारत के अरुणाचल प्रदेश और लद्दाख में ही दिखाई देगा। भारतीय समयानुसार ये दोपहर 1.42 बजे शुरू होगा और शाम 6.41 बजे खत्म हो जाएगा। ज्येष्ठ अमावस्या तिथि पर साल का पहला सूर्य ग्रहण 10 जून को है। सूर्य ग्रहण वृषभ राशि और मृगशिरा नक्षत्र में लगेगा। भारतीय समयानुसार सूर्य ग्रहण दोपहर 01 बजकर 42 से शुरू हो जाएगा। 10 जून को सूर्य ग्रहण के साथ शनि जयंती और वट सावित्री व्रत भी है। 148 वर्षों बाद सूर्य ग्रहण, वट सावित्री व्रत और शनि जयंती एक साथ है। भारत में सूर्यग्रहण दिखाई नहीं देगा इस कारण से यहां सूतककाल मान्य नहीं रहेगा।

सूर्य ग्रहण के साथ साथ इसी दिन शनि जयंती का संयोग बना है अतः इस समय कुंभ, धनु और मकर राशि वालों पर शनि की साढ़ेसाती चल रही है। शनि की साढ़ेसाती लगने पर व्यक्ति को कई तरह की समस्याओं का सामना करना पड़ता है। शनि को ज्योतिष में क्रूर और पापी ग्रह कहा जाता है। शनि के अशुभ होने पर व्यक्ति का जीवन बुरी तरह से प्रभावित हो जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार शनि देव कर्मों के हिसाब से फल देते हैं, जिस वजह से शनिदेव को कर्म फल दाता भी कहा जाता है। ज्येष्ठ माह की अमावस्या तिथि पर शनि जयंती मनाई जाता है। ऐसा माना जाता है इस दिन शनिदेव का जन्म हुआ था। इस दिन विधि- विधान से पूजा करने से शनि देव की विशेष कृपा प्राप्त होती है। आइए जानते हैं शनिदेव को प्रसन्न करने के लिए इस दिन क्या करना चाहिए।

धार्मिक दृष्टि से इस दिन नए व मांगलिक कार्य को शुभ नहीं माना जाता है। वहीं ग्रहण के समय खाना बनाना या खाना दोनों ही शुभ नहीं होते हैं। ग्रहण के समय में भगवान की मूर्ति छूना और पूजा करना भी वर्जित होता है। ग्रहण के समय में तुलसी के पौधे को भी हाथ नहीं लगाया जाता है। ग्रहण के समय सोने से भी बचना चाहिए।

इस समय कोरोना वायरस की वजह से घर में रहकर ही शनिदेव की पूजा करें। शनिदेव को प्रसन्न करने के लिए इस दिन शनि चालीसा का पाठ करें। आप एक से अधिक बार भी शनि चालीसा का पाठ कर सकते हैं। शनि चालीसा का पाठ करने से शनि के अशुभ प्रभावों से मुक्ति मिलती है।

वर्तमान समय मे चल रही कोरोना महामारी मे कई लोग प्रभावित हुए है अतः अपने सामर्थ्यानुसार जरूरतमंदो को दान पुण्य कर्म करे,इस पावन दिन दान करने से विशेष फल की प्राप्ति होती है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार शनि देव उन लोगों से प्रसन्न रहते हैं जो दान- पुण्य करते हैं। दान करने से कई गुना फल की प्राप्ति होती है।