बल्ब जलने से दूर होगी डायबिटीज, पीलीभीत के युवा को फ्रांस ने दिया ऑफर

उत्तर प्रदेश के पीलीभीत जनपद के पूरनपुर कस्बे के गांव गोपालपुर निवासी एक युवा वैज्ञानिक ने एक खास प्रयोग किया है जिससे डायबिटीज की बीमारी को दूर किया जा सकता है। मां की बीमारी से त्रस्त होकर इस युवा छात्र ने शुगर की बीमारी को दूर करने के लिए अपने जिंदगी के 10 साल लगा दिए। कड़ी मेहनत का परिणाम यह है कि फ्रांस ने इस होनहार विद्यार्थी को अपने देश में नौकरी का ऑफर तक दे दिया। आपको बता दें कि डायबिटीज एक ऐसी बीमारी है जो व्यक्ति को शारीरिक रूप से कमजोर कर देती है। इस युवा वैज्ञानिक ने एक ऐसा बल्ब बनाया है जिसके जलने मात्र से डायबिटीज स्वतः समाप्त हो जाएगी। यही नहीं इस बल्ब से ब्लड प्रेशर भी संतुलित रहता है।

कानपुर से किया बीटेक

धर्मेंद्र कुमार मूल रूप से पूरनपुर तहसील क्षेत्र के गोपालपुर गांव के रहने वाले हैं उनके पिता विश्राम सागर बच्चों को ट्यूशन पढ़ा कर अपना परिवार चलाते हैं। दो भाई और एक बहन मैं सबसे बड़े धर्मेंद्र ने गांव के ही प्राथमिक विद्यालय में शुरुआती पढ़ाई की इसके बाद उन्होंने इंटर तक पढ़ाई सरकारी स्कूल से की। उन्होंने एआईटी कानपुर से बीटेक किया और बाद में डीएमई डायविटीज का डिप्लोमा।

कहां से आया विचार

धर्मेन्द्र कुमार की माता विमला देवी डायबिटीज की मरीज थी। माताजी की दिक्कत से तंग आकर उन्होंने डायबिटीज को जड़ से समाप्त करने के बारे में सोचना शुरू कर दिया. चूंकि यह वैज्ञानिक ने पढ़ाई डायबिटीज के बारे में की थी इसलिए अपना दिमाग डायबिटीज को दूर करने के लिए कुछ ना कुछ नया करने के लिए इस्तेमाल करना शुरू कर दिया। और मेहनत कर इस डिवाइस को तैयार कर लिया। सबसे पहले उसने अपनी मां पर ही इसका प्रयोग कर डाला जिसमें उसको पूर्णतः सफलता मिली।

कैसे काम करती हैं यह डिवाइस काम

धर्मेंद्र के मुताबिक रोगी को सिर्फ कमरे में रात को यह बल्ब जलाकर सोना है. बाकी काम डिवाइस करेगी और 90 से 120 दिनों तक यह प्रक्रिया अपनाने पर डायबिटीज अपने-आप नष्ट हो जाएगी। धर्मेंद्र बताते हैं कि तरंगे हमारे शरीर में स्टेम सेल के जरिए प्रवेश करती हैं और धीरे-धीरे हमारे अमीनो एसिड्स के स्तर को बढ़ाती हैं व मजबूत बनाती हैं जिससे न्यूरोट्रांसमीटर्स व रिसिवर्स पूरी तरह से काम करने लगते हैं। जिससे हमारे शरीर के अंदर के बीटा सेल्स मजबूत हो जाते हैं और पर्याप्त मात्रा में इंसुलिन बनाने लगते हैं। जिससे डायबिटीज समाप्त होती है।

धर्मेंद्र कुमार को अंतरराष्ट्रीय वैज्ञानिकों की संस्था लिरिक्स इंटरनेशनल कम्युनिटी ने प्रस्तुतीकरण के लिए फ्रांस बुलाया है लेकिन एक साल से जारी लॉकडाउन के चलते वे फ्रांस नहीं पहुंच सके। अब उन्हें इंतजार है लॉकडाउन खुलने का जब वे विदेश जाकर अपनी खोज को अंतरराष्ट्रीय वैज्ञानिकों के समक्ष प्रस्तुत करेंगे। बता दें कि यह डिवाइस सिर्फ 2300 रुपए में बनकर तैयार हो जाएगी।