इंतजार उसके आने का

कल का बेसब्री से इंतज़ार था
कल तुमसे मुलाक़ात जो होनी थी।
मिलने का समय नज़दीक आया
पर ख्वाहिशें मेरी पूरी होने से पहले ही चकना चूर हो गई।

कुछ दिन पहले की ही बात थी,
तुम्हारी तरफ़ बढ़ते मेरे क़दमों को,
एक और सीढ़ी मिली थी।
उसे देखते ही मेरी खुशी का ठिकाना न रहा था,
मेरी ऑंखें खुशी के ऑंसुओ का बोझ,
उठा भी न पा रही थीं।

तो वे भी छलक कर मेरी ऑंख से बाहर आ गिरे थे।
हर्षोल्लास का समा बन सा गया था,
और मेरा मन खुशी से इस क़दर झूम रहा था।
कि मेरी ज़ुबान पर कुछ देर के लिए मानो ताला सा लग गया हो।

सब मुझसे वजह जानने को बेकरार बैठे थे।
पर मैं उनके सामने अपने मन की बात कह भी न पा रही थी,
जिससे मिलने के लिए दो वर्ष इंतज़ार किया,
वो आखिर मेरे सामने बस आने ही वाला था।

एक दिन ही था मेरे पास, तैयारी पूरी करने को।
पूरे शहर में घूम घूम कर, कोरोना की चिंता किए बिना,
बस तेरे ही लिए, सामान जुटाने में लग गई।

२ जून की वो रात थी, तैयारी मेरी पूरी हो चुकी थी ।
तुमसे मिलने की खुशी इस हद तक बढ़ चुकी थी,
की रात भर मैं चैन से सो भी न पाई थी।

रात कटी जैसे तैसे, सुबह को फिर काम पर लग गई,
कुछ ही पल बीते थे खुशी के, कि अचानक मेरी खुशी बस वहीं थम गई।

सुनने में आया कि कुछ महानुभावों की गलतियों के कारण,
तुम फिर से मुझसे दूर हो गए।
मेरे जीवन की रेल जो पटरी पर चलना शुरू ही हुई थी,
वो फिर से पटरी से उतर गई।

सपने मेरे सारे बस एक पल में ही भिखर गए,
सबके सामने तो मैं थी संभली हुई, पर अंदर से टूट चुकी थी।

अब बस इंतज़ार है मुझे उस घड़ी का,
जब तुम मुझे मिल जाओ ।
मेहनत जितनी मैंने तुम्हें पाने के लिए की है,
उसके फल के रूप में तुम बस मेरे बन जाओगे ।

शैली शर्मा

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