कैसे घर में आयेगी सुख और समृद्धि,वास्तु के हिसाब से इस तरह बनाए अपना घर

आजकल पूरे विश्व में वास्तु शास्त्र का प्रचलन बहुत बढ़ गया है । कोई भी व्यक्ति अपने घर या ऑफिस का निर्माण करता है वह वास्तु का विशेष ध्यान रखता है । वास्तु में केवल दिशा का ही नहीं महत्व होता हैं बल्कि घर या ऑफिस का लम्बाई चौड़ाई और ऊचांई का भी विशेष महत्व है । सामान्य रुप आयाम और लबांई और भवन की चौड़ाई के बीच माप का अनुपात के बारे में भी हैं, 1:1 या 1:5 या अधिकतम 1:2 का अनुपात होना चाहिए । वास्तु के अनुसार आपके घर में कितने कमरे किस लम्बाई चौड़ाई और किस दिशा में होने चाहिए इस बात पर ध्यान दिया जाता है । घर में आप को क्या क्या प्रमुख चीजों की जरुरत होती है इस बात का भी विशेष ध्यान रखते है जैसे शौचालय, पूजा घर, बेडरुम, डांइनिंग रुम गेस्ट रुम इत्यादि

आइए हम आप को इस लेख के माध्यम से बताते है कि आप को इन सब कैसे कर के बनवाए जिससे आप उन्नति करें ।

जानिए आप का आदर्श घर कैसा होना चाहिए

घर का मुख्य द्वार कहां हो

सबसे पहले हम आप को आप के घर के मुख्य द्वार के बारे में बतायेगें कि आप का मुख्य द्वार किस दिशा में और कौन कौन से चिन्ह मुख्य द्वार पर लगाना शुभ होगा । घर का मुख्य द्वार सिर्फ पूर्व या उत्तर में होना चाहिए । हांलाकि वास्तुशास्त्री मानते है कि घर का मुख्य द्वार चार में से किसी एक दिशा में हो । वे चार दिशाएं है – ईशान, उत्तर वायव्य और पश्चिम ।

पूर्व या उत्तर का द्वार इसलिए होना चाहिए क्योंकि पूर्व दिशा से सूरज निकलता है और उत्तरी ध्रुव से आने वाली हवाएं अच्छी होती है । घर बनाने से पहले आप को एक बात का विशेष ध्यान रखना कि आप को हवा,प्रकाश और ध्वनि के आने के रास्तों पर ध्यान देना जरुरी है ।

घर का आंगन कहां होना चाहिए

घर का सबसे प्रमुख स्थान घर का आंगन होता है इसलिए आप को इस बात का ध्यान रखना बहुत जरुरी कि आप के घर में आंगन जरुर हो । प्राचीन हिन्दू घरों में बड़े – बड़े आंगन होते थे । लेकिन आज के समय में घर बहुत छोटे हो गए है इसलिए आंगन भी छोटा हो गया है । इसलिए घर में आगे या पीछे छोटा आंगन होना आवश्यक है । घर के आंगन में तुलसी, अनार जामफल, कड़ी पत्ता, नीम, आंवला आदि

घर में शौचालय और स्नानघर कहां होना चाहिए

घर में शौचलय और स्नानघर बनाते समय वास्तु का विशेष ध्यान रखना चाहिए । क्योंकि अगर यह दोनों चीजें गलत बन गई तो घर का वातावरण बिगड़ सकता है । घर का स्नानघर पूर्व दिशा में होना चाहिए और शौचलय नैऋत्य (पश्चिम-दक्षिण)कोण में होना चाहिए ।

घर में पूजाघर कहां हो

घर में पूजा का स्थान सबसे अहम होता है क्योकिं इस स्थान से आपके मन और मस्तिष्क में शांति मिलती है तो यह स्थान अच्छा होना चाहिए । एक बात का विशेष ध्यान रखना चाहिए कि आप को अपना पूजा घर कभी भी शयनकक्ष में न हो ।घर में पूजा घर या पूजा का स्थान ईशान कोण में होना चाहिए।

घर में शयनकक्ष कहां हो

घर में एक औऱ प्रमुख स्थान होता है घर का शयनकक्ष अर्थात बेडरुम । इसका सुकून और शांतिभरा होना चाहिए जिससे आप को नींद बहुत अच्छी आए । घर में शयनकक्ष दक्षिण-पश्चिम (नैऋत्य) या उत्तर-पश्चिम (वायव्य) की ओर होना चाहिए । शयनकक्ष में सोते समय हमेशा सिर दीवार पर सटाकर सोना चाहिए । एक बात का विशेष ध्यान रखना जरुरी है कि सोते समय आप के पैर दक्षिण दिशा में न हो ।