निरोगी नारी हम सबकी जिम्मेदारी

विश्व माहवारी स्वच्छता दिवस पर लेखिका मुस्कान सिंह का आलेख ‘माहवारी अभिशाप नहीं वरदान है’

28 मई को सभी देश ‘विश्व माहवारी स्वच्छता दिवस’ के रूप में मनाते हैं। इसकी शुरुआत जर्मनी देश की एक संस्था वॉश यूनाइटेड ने 2014 में की थी। इसे मनाने के लिए 28 तारीख चुनी गई थी क्योंकि आमतौर पर महिलाओं का मासिक धर्म 28 दिनों के अंदर आता है।हमारे देश के कई हिस्सों में माहवारी को अछूत माना जाता है। मासिक धर्म से जुड़ी बातों के बारे में आज भी हम सभी खुल कर बात करने से डरते हैं ।किशोरियों और महिलाओं को इस पर बोलने की पाबंदी लगा दी जाती है।

मासिक धर्म से जुड़ी पौराणिक मान्यताएं

आज भी कई जगहों पर महिलाओं को पौराणिक मान्यताओं के अनुसार मासिक धर्म के दौरान लोगों से अलग रखा जाता है। ऐसी ही कई मान्यताएं सालों से भारत के लोगों को जकड़े हुए हैं। मासिक धर्म में महिलाओं के अपवित्र होने जैसा यह अंधविश्वास इतना गहरा है कि माहवारी के दौरान महिलाओं को रसोईघर में भी जाने नहीं दिया जाता। उनका मानना है कि यदि महिलाओं ने माहवारी के दौरान किसी खाने की वस्तु को छू लिया तो खराब हो जाएगी। जैसे हम अपने घरों में ही देख सकते हैं कि मासिक धर्म के दौरान महिलाएं आज भी आचार की बोतलें नहीं छू सकती हैं।

मासिक धर्म को उत्सव के रूप में मनाने की प्रथा

देश के कई हिस्सों में जहा मासिक धर्म को अपवित्र माना जाता है तो वहीं कई हिस्सों में इसे उत्सव के रूप में भी मानने की परंपरा है। उड़ीसा में आज भी मध्य जून यानी 14 जून से ‘रजो’ पर्व के नाम से इसे त्यौहार के रूप में मनाया जाता है। चार दिनों तक चलने वाले इस उत्सव का सबसे आकर्षक पक्ष यह है कि इसे केवल देवी तक ही सीमित नहीं रखा जाता बल्कि किशोरियों, युवतियों और स्त्रियों को भी शामिल किया जाता है।

आंध्र प्रदेश एवं तेलंगाना में मासिक धर्म का उत्सव ‘पुष्पलता’ के नाम से, कर्नाटक में ‘तुलु’ उत्सव, जिसे ‘केदसा’ कहा जाता है। शक्तिपीठों में सबसे महत्वपूर्ण और तंत्र विद्या का केंद्र माने जाने वाले कामाख्या मंदिर में प्रत्येक वर्श ‘अंबुमाची’ उत्सव मनाया जाता है, जो कि तीन दिनों तक चलता है। मान्यता है कि देवी मासिक धर्म से होती है और उनके श्वेत वस्त्र लाल हो जाते हैं। इस पीठ में देवी के योनि स्वरुप की पूजा की जाती है।

आंध्र प्रदेश के देवीपुरम में देवी ललिता त्रिपुरसुंदरी के रजस्वला होने की मान्यता है। मंदिर के मुख्य पुजारी श्री अमृतानन्द नाथ सरस्वती मानते हैं कि रजस्वला में स्त्री इतनी पवित्र होती है कि वह देवी होती है।

मासिक धर्म के बारे में बात करना है जरूरी

ऐसे ही ना जाने कितने ही स्थान है जहां मासिक धर्म को शुद्ध और पवित्र माना जाता है फिर भी ना जाने समाज इसे क्यों अछूत और अपवित्र मानता है। जबकि इसके बारे में जानना और बातें करना पुरषों के लिए भी उतना ही जरूरी है जितना कि महिलाओं के लिए है। आज भी देश में ऐसी कई महिलाएं हैं जो यह तक नहीं जानती हैं कि सेनेट्ररी नेपकिन होता क्या है उसका इस्तेमाल कैसे किया जाता है, माहवारी के दौरान साफ सफाई रखना कितना जरूरी होता है। इस आधुनिक समय में बाज़ार में जहां कई तरह के उत्पाद उपलब्ध हैं जो कि मासिक धर्म के दौरान इस्तेमाल किए जाते हैं तो वहीं देश की 88 फीसदी महिलाएं आज भी ऐसी हैं जो बाजार के किसी भी सामान का उपयोग नहीं करती हैं। आज भी कई महिलाएं सेनेट्ररी नेपकिन की जगह कपड़े का प्रयोग करती हैं जिसकी वजह से दो करोड़ से भी अधिक लड़कियां अपने मासिक धर्म के दौरान स्कूल नहीं जा पाती हैं।

मासिक धर्म के दौरान किस तरह रखें सफाई का ध्यान

मासिक धर्म के दौरान सफाई रखना बेहद जरूरी है क्योंकि इससे कई तरह की बीमारियों से बचा जा सकता है। महिलाओं को अपने मासिक धर्म के दौरान इन बातों का रखना है ध्यान :

• समय-समय पर सेनेट्ररी नेपकिन बदलें – मासिक धर्म के दौरान हर पांच से छह घंटे में सेनेट्ररी नेपकिन को बदलते रहना चाहिए ताकि बीमारियों के संक्रमण से बचा जा सके। बाज़ार वाले उत्पादों का प्रयोग कर रहे हैं तो उन्हें भी समय-समय पर बदलते रहना चाहिए।

• प्राइवेट पार्ट की सफाई पर रखें ध्यान – मासिक धर्म के दौरान महिलाओं को अपनी वजाइना यानी अपनी योनि को नियमित रूप से साफ़ करते रहना चाहिए जिससे खतरनाक बीमारियों के संक्रमण से बचा जा सके।

• कपड़े को गर्म पानी से धोएं – देश में ऐसी कई महिलाएं हैं जो खराब आर्थिक स्थिति के चलते सेनेट्ररी नेपकिन नहीं खरीद पाती हैं तो वह कपड़े का प्रयोग करती हैं। उन्हें यह ध्यान रखना चाहिए कि वह एक बार कपड़ा इस्तेमाल करने के बाद उस कपड़े को दोबारा इस्तेमाल ना करे और यदि वह कर रही हैं तो इस्तेमाल किए कपड़े को हमेशा दो से तीन बार गरम पानी से धोएं और उस कपड़े को धूप में सुखाने के बाद ही इस्तेमाल करें।

नीरोग नारी यह है हम सब की जिम्मेदारी

मासिक धर्म के दिनों में लड़कियां शारीरिक और मानसिक कई तरह की तकलीफों से गुजरती हैं। इसलिए समाज को उनकी तकलीफें न बढ़ाकर उनका साथ देना चाहिए। हम सभी की जिम्मेदारी है कि हमारे घर की महिलाएं या आस-पड़ोस की महिलाएं हमेशा स्वस्थ रहें, उन्हें कभी कोई तकलीफ ना हो खास तौर पर मासिक धर्म के दौरान।

लेखिका मुस्कान सिंह माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता विश्वविद्यालय की छात्रा हैं ।

इस लेख में व्यक्त विचार/विश्लेषण लेखक के निजी हैं। यह जरूरी नहीं है कि मंथन न्यूज़ 24 लेखक से सहमत हो । इस लेख से जुड़े सभी दावे या आपत्ति के लिए सिर्फ लेखक ही जिम्मेदार है ।