एमपी को मिली बड़ी सौगात, यूनेस्को वर्ल्ड हैरिटेज साइट में शामिल हुआ होशंगाबाद का सतपुड़ा टाइगर रिजर्व

सतपुड़ा टाइगर रिजर्व और जबलपुर के भेड़ाघाट-लम्हेटा घाट को यूनेस्‍को की विश्‍व धरोहर स्‍थलों की संभावित सूची में शामिल किया गया है। प्रमुख सचिव पर्यटन शिवशेखर शुक्ला ने बताया कि अब मध्यप्रदेश ऐसा राज्‍य बन गया है, जहां से दो स्‍थलों को यूनेस्‍को विश्‍व धरोहरों की प्राकृतिक श्रेणी की संभावित सूची में शामिल किया गया है। अगले चरण में इन स्‍थलों का नॉमिनेशन डॉजियर यूनेस्‍को द्वारा निर्धारित प्रक्रिया के तहत भेजा जायेगा। उन्होंने बताया कि संभावित स्‍थलों की सूची में विशिष्‍ट विशेषताओं वाले स्‍थलों को ही शामिल किया जाता है।

होशंगाबाद जिले का सतपुड़ा टाइगर रिजर्व (एसटीआर) अपने प्राकृतिक सौंदर्य और बाघों के रहवास के लिए विश्व प्रसिद्ध है। मढ़ई, चूरना पर्यटन स्थल है। जहां बाघ के अलावा अन्य वन्यप्राणी पाएं जाते हैं। इन्हें देखने देशभर के लोग आते हैं। केंद्रीय संस्कृति एवं पर्यटन राज्य मंत्री प्रह्लाद सिंह पटेल ने कहा है कि 6 स्थलों को यूनेस्को की संभावित सूची में जगह मिलना देश के लिए गौरव की बात है। उन्होंने मध्यप्रदेश से दो स्थलों को यूनेस्को वर्ल्ड हैरिटेज साइट्स में चयन को लेकर खुशी जाहिर की है। उन्होंने इसे मध्य प्रदेश के लिए गौरव का क्षण बताया है।

यूनेस्को ने मध्य प्रदेश के दो बड़े पर्यटन स्थलों को विश्व धरोहर की सूची में शामिल कर लिया है। केंद्रीय संस्कृति मंत्रालय की संस्था, एएसआई ने यूनेस्को विश्व धरोहर की संभावित सूची में शामिल करने के लिए नौ स्थलों का नाम प्रस्तावित किया था, जिनमें से छह स्थलों को संभावित सूची में शामिल कर लिया गया है। इनमें मध्यप्रदेश के दो स्थल शामिल हैं। पहला- नर्मदा घाटी पर बना भेड़ाघाट-लम्हेटाघाट और दूसरा- सतपुड़ा टाइगर रिजर्व शामिल है। ये दोनों ही स्थल अपनी खासियत के लिए विश्व में पहचाने जाते हैं। जबलपुर के भेड़ाघाट में नर्मदा की धार पूरे विश्व में प्रसिद्ध है तो वहीं दूसरी तरफ प्राकृतिक सौंदर्य और बाघों के बेहतर रहवास के लिए सतपुड़ा टाइगर रिजर्व एरिया विश्वभर में प्रसिद्ध है। अब यूनेस्को की सूची में शामिल होने के बाद यह विश्व धरोहर में शामिल हो गया है।