आयुर्विज्ञान विश्वविद्यालय के उप कुलसचिव सुनिल खरे के संरक्षण में प्रदेश में मेडिकल और नर्सिंग शिक्षा माफिया फलफूल रहा : NSUI

भोपाल: एनएसयूआई मेडिकल विंग के प्रदेश समन्वयक रवि परमार ने बड़ा खुलासा किया है कि विश्वविद्यालय द्वारा सत्र 2018 और 2019 में जो कॉलेजों का निरीक्षण किया गया था उसमें कई निजी कॉलेजों की अनियमितताएं और कमियों पर उप कुलसचिव पर्दा डाल रहे हैं।
परमार ने उप कुलसचिव सुनील खरे से सूचना के अधिकार माध्यम से जानकारी मांगी गई तो पहले तो उन्होंने जानकारी छुपाने का पूरा प्रयास किया लेकिन जब विरोध बढ़ने लगा तो वह विश्वविद्यालय से भाग खड़े हुए।

रवि परमार ने मीडिया को जानकारी देते हुए बताया कि विश्वविद्यालय द्वारा सत्र 2018 और 2019 के निरीक्षण में मेडिकल काउंसिल ऑफ इंडिया (MCI) और विश्वविद्यालय के मान्यता संबंधित नियमों का उल्लंघन किया गया है। निरीक्षण में भोपाल जिले के 4 प्राइवेट होम्योपैथिक, 4 प्राइवेट आयुर्वेदिक, 30 प्राइवेट नर्सिंग कॉलेज, 10 प्राइवेट पैरामेडिकल कॉलेज शामिल हैं। प्रदेश के अनेकों कॉलेज हैं जो कि विश्वविद्यालय को गुमराह कर फर्जी स्टाफ दिखाकर या किराये की बिल्डिंग दिखाकर पैसे का लेनदेन कर मान्यता ले लेते हैं और मेडिकल काउंसिल ऑफ इंडिया और विश्वविद्यालय के नियमों का बिल्कुल भी पालन नहीं करते।

जिससे मध्य प्रदेश के बेकसूर छात्रों का भारी नुकसान होता है मोटी फीस वसूलने के बाद भी कॉलेज में उनकी क्लासेस नहीं लगाई जाती हैं। अयोग्य शिक्षकों से उनका अध्यापनकार्य कराया जाता है जिससे छात्रों का भविष्य अंधकार में है। प्राइवेट कॉलेजों और शिक्षा माफियाओं को कहीं ना कहीं विश्वविद्यालय के उप-कुलसचिव सुनील खरे का संरक्षण भी प्राप्त रहता है। जिससे कि वह बिना डरे छात्र-छात्राओं के भविष्य के साथ इतना बड़ा खिलवाड़ कर रहे हैं।

रवि परमार ने कहा कि प्राइवेट कॉलेजों के निरीक्षण में विश्वविद्यालय द्वारा की जा रही गड़बड़ी में जो भी अधिकारी शामिल हैं उनके खिलाफ जानकारी निकाल कर एफआईआर दर्ज करायी जाएगी।

परमार ने बताया कि विश्वविद्यालय के उप कुलसचिव डॉ. सुनील खरे से मेरे द्वारा सूचना के अधिकार के अंतर्गत जानकारी मांगी गई थी लेकिन उप-कुलसचिव द्वारा जानकारी नहीं दी गई। डॉ. खरे के संरक्षण में मेडिकल ओर नर्सिंग शिक्षा माफिया फलफूल रहा है। पूरे मामले को एनएसयूआई जल्दी ही सूचना आयोग के संज्ञान में लायेगी और एनएसयूआई के लीगल सेल के माध्यम से माननीय न्यायालय में मामला दर्ज कराया जाएगा ।