मेडिकल विश्वविद्यालय के उपकुलसचिव सुनिल खरे को बचाने में जुटे माफिया

भोपाल: प्रदेश के एकमात्र मेडिकल विश्वविद्यालय मध्य प्रदेश आयुर्विज्ञान विश्वविद्यालय जबलपुर के उप कुलसचिव सुनील खरे को बचाने में विश्वविद्यालय से मंत्रालय राजभवन तक शिक्षा माफिया के अधिकारी जुट गए हैं। मंगलवार को सुनील खरे को विश्वविद्यालय में व्याप्त अनियमितताओं और भ्रष्टाचार के चलते चिकित्सा शिक्षा मंत्री विश्वास सारंग के मौखिक आदेश पर कुलसचिव डॉ संजय तोतडे द्वारा उप कुलसचिव सुनील खरे की सेवाएं तत्काल प्रभाव से उनके मूल उच्च शिक्षा विभाग को सौंप दी गई थी ।

एनएसयूआई मेडिकल विंग के प्रदेश समन्वयक रवि परमार का कहना है कि विश्वविद्यालय से भ्रष्ट उप कुलसचिव सुनील खरे को हटाने के बाद में सुनील खरे को दोबारा नियुक्त किए जाने के लिए शिक्षा माफियाआंे ने राजभवन से लेकर मंत्रालय तक विश्वविद्यालय में हस्तक्षेप करते हुए सुनील खरे को बचाने का प्रयास कर रहा है।

रवि परमार ने कहा कि अगर सुनील खरे पर तत्काल कार्रवाई नहीं की गई तो एनएसयूआई उग्र प्रदर्शन के लिए बाध्य होगी क्योंकि सुनील खरे पर भ्रष्टाचार के आरोप लगने के बाद से शिक्षा माफियाओं ने उनके सरदार सुनील खरे को बचाने के लिए कुबेर के खजाने खोलें ओर तन मन धन सभी प्रकार से शिक्षा माफियाओं के सरदार सुनील खरे को बचाने के प्रयास में लगे आखिर सुनिल खरे विश्वविद्यालय को ऐसा कौन सा फायदा जिससे कि वो 5 से 6 साल विश्वविद्यालय में प्रतिनियुक्ति पर हैं इनकी प्रतिनियुक्ति तो सिर्फ 3 साल की थी प्रतिनियुक्ति के बावजूद यहां सिर्फ एक ही विभाग में 5-6 से हैं इन सालों में कई अधिकारी आए और चले गए कई अधिकारियों के विभाग बदले लेकिन इनका विभाग क्यों नहीं बदला गया आखिर क्या वजह है इस सब के पीछे की इनकी प्रतिनियुक्ति समाप्त नहीं की गई।

रवि परमार का आरोप है कि सुनील खरे की वजह से विश्वविद्यालय को काफी नुकसान हुआ है क्योंकि इनके द्वारा कॉलेजों को समय पर संबंध्ता नहीं दी जाती है। जिससे कि छात्रों की परीक्षा में देरी होना और परिणामों में देरी होने जैसी अनियमितताएं उत्पन्न हो रही हैं एनएसयूआई प्रतिनियुक्ति समाप्त करने हेतु उच्च शिक्षा विभाग जाएंगे और चिकित्सा शिक्षा विभाग और राजभवन के संज्ञान में भी पूरा मामला लाकर जल्द से जल्द कार्रवाई करवाएंगे।