कॉलेजों में नहीं हो रहा निर्देशों का पालन बढ़ रहा कोरोना संक्रमण का खतरा

उच्च शिक्षा विभाग के सरकारी और निजी कॉलेजों की यूजी कक्षाओं में एडमिशन की प्रक्रिया शुरू हो गई है। इस वर्ष कोराना संक्रमण के बढ़ते खतरे को देखते हुए मप्र शासन ने ऑनलाइन माध्यम से काॅलेजों में प्रवेश कराने के आदेश जारी किए हैं। लेकिन प्रदेश के अधिकतर काॅलेजों में ऑनलाइन व्यवस्था ठप पढ़ी है। जिसके चलते छात्रों को महाविद्यालय परिसर में आकर अपना सत्यापन कार्य कराना पड़ रहा है। इससे काॅलेजों में सोशल डिस्टेंसिंग का पालन बिल्कुल भी नहीं हो रहा है जिसके बाद कोविड के संक्रमण का खतरा निरंतर बना हुआ है।

आयुक्त उच्चशिक्षा विभाग ने दिनांक 04/08/2020 को ऑनलाइन प्रवेश प्रक्रिया 2020-21 हेतु प्राचार्याें को आवश्यकता के अनुसार रोटेशन के आधार पर सत्यापन हेतु अधिकारियों कर्मचारियों की उपलब्धता सुनिश्चित करने के स्पष्ट निर्देश जारी किए हैं। अधिकतर प्राचार्योेेें ने इन निर्देशों का पालन करते हुए एक दिन का अंतराल देते हुए उपस्थित हेतु आदेशित किया है।

शासकीय हमीदिया महाविद्यालय में दो दल गठित कर के एक दल को सप्ताह में पहले 3 दिन और दूसरे दल को अंतिम 3 दिन प्राध्यापकों को उपस्थित रहने हेतु आदेशित किया गया है। कोरोना चेन तोड़ने की दृष्टि से रोटेशन का यह अर्थ भी ठीक है। किंतु कुछ महाविद्यालयों में प्राचार्य रोटेशन का मनमाना अर्थ लेकर सभी प्रोफेसरों कर्मचारियों को प्रतिदिन उपस्थिति हेतु बाध्य कर रहे हैं। आधे स्टाफ को पूर्वान्ह में और शेष आधे स्टाफ को अपरान्ह में बुलाए जाने से दोपहर में सारा स्टाफ एक साथ जमा होकर कोरोना वायरस के खतरे कोे बढ़ा रहा है। रोटेशन के अनुसार एक दिन अथवा तीन दिन का अंतर रखकर इस खतरे से बचना जरूरी है।

महाविद्यालय प्राध्यापक संघ के संभागीय अध्यक्ष डॉ अरुण शुक्ला की मांग पर अतिरिक्त संचालक उच्चशिक्षा जबलपुर संभाग डाॅ. लीला भलावी ने आदेश जारी कर प्रोफेसरों और कर्मचारियों को उपस्थिति से छूट देते हुए बीमार और दिव्यांग प्राध्यापकों को प्रवेश प्रक्रिया से मुक्त रखने। रोटेशन के आधार पर कुल स्टॉफ का 30 फीसदी ही बुलाने हेतु आदेश जारी किए हैं। जबकि भोपाल नर्मदापुरम संभाग में कोरोना का संकट जबलपुर से अधिक गहरा होने के बावजूद यहां के कॉलेजों में सभी प्राध्यापकों को प्रतिदिन बुलाया जा रहा है। आयुक्त उच्चशिक्षा के निर्देश सभी अतिरिक्त संचालकों और प्राचार्याें के लिए एक से हैं फिर भी अलग-अलग कॉलेजों संभागों में अलग क्रियान्वयन से प्रोफेसर परेशान हो रहे हैं। सत्यापन के लिए विद्यार्थियों की बढ़ती भीड़ से कोरोना संकट और भी गहरा होता जा रहा है।