पीपल बाबा ने पेश किया जल संरक्षण का अनोखा तरीका, बारिश के पानी को वर्षाें तक कर सकेंगे उपयोग

देश के सुप्रसिद्ध पर्यावरण कर्मी पीपल बाबा ने लगातार गिरते जलस्तर को देखते हुए एक अनोखे तरीके को इजात किया है जिससे जंगलों के बीच पेड़ पौधों को पानी दिया जा सकेगा साथ ही बारिश के जल को संरक्षित करके भविष्य में उपयोग किया जा सकता है। पीपल बाबा के मुताबिक जल संरक्षण की शुरुआत तालाब बनाने के साथ प्रारंभ होती है। तालाब के निर्माण की प्रक्रिया परिष्करण, पानी का गड्ढा, खाद और हैंडपम्प लगाने के साथ ही शुरू होती है।

संपूर्ण जंगल में पानी के लिए मात्र एक तालाब की आवश्यकता होती है जिसे सबसे ज्यादे ढलान वाले स्थान पर बनाया जाता है। मिट्टी को तालाब में आने से रोकने के लिए तालाब के 10 फीसदी हिस्से में जलकुम्भी लगाई जाती है। हालांकि जलकुंभी ज्यादा होने से तालाब में कार्बन डाई ऑक्साइड की मात्रा अत्यधिक हो जाती है, इसलिए समय समय पर इन जलकुंभियों को तालाब से साफ किया जाता है।

वहीं मिट्टी को जकड़ के रखने के लिए तालाब के किनारों पर घांस और पेड़ भी लगाए जाते हैं। वहीं पीपल बाबा तालाब के एंट्री पॉइंट्स पर अम्ब्रेला पोम नामक घास लगाते हैं, यह घास वाटर फिल्टर का कार्य करती है। आपको बता दें कि अम्ब्रेला- पोम नामक यह घांस पूरी दुनियां में पायी जाती है, लेकिन जापान में इसका प्रयोग तालाब के पानी को फिल्टर करने के लिए किया जाता है।

तालाब को कैसे बनाया जाता है

पीपल बाबा बताते हैं कि जिस दिन से जंगल लगाने का कार्य शुरू होता है उसी दिन से इन जंगलों में ऐसे स्थानों को खोजा जाता है जहाँ सर्वाधिक ढलान हो और फिर उस जगह पर तालाब बनाने की प्रक्रिया का शुभारंभ किया जाता है। तालाब बनाते समय विशेष ध्यान दिया जाता है कि तालाब में चारों तरफ से पानी आकर रुके। तालाब के एंट्री पॉइंट्स पर अम्ब्रेला पोम के पौधे लगाए जाते हैं। इन पौधों की जड़ो से होकर गुजरने पर यह जल शुद्ध हो जाता है। 3-4 सालों में वर्षा जल प्राप्त करते हुए ये तालाब सालों साल पानी से भरे रहने लगते हैं। इसके कारण हर साल हो रहे जलसंचयन की वजह से जमीन का जलस्तर काफी ऊंचा उठ जाता है और भूमिगत जल से ये तालाब हमेशा स्वतः चार्ज होते रहते हैं।

क्यों जरुरी है जंगलों में तालाब बनाना ?

घने जंगलों में जैसे-जैसे पेड़ बढ़ते हैं इन पेड़ों के बीच वाटर टैंकरों के आने की संभावना घटती जाती है। इसीलिए तालाब और हैंडपम्प की आवश्यकता होती है। पीपल बाबा की टीम के अहम सदस्य जसवीर मलिक बताते हैं कि कोरोना काल में जब लॉकडाउन लगा तो पानी के टैंकर बाहर से आने बंद हो गए और प्रचंड गर्मियों में जंगलों के बीच के तालाबों से ही पानी की आपूर्ति सुनिश्चित की गई। तालाब और जंगलों के बीच अनेकों स्थान पर छोटे-छोटे गड्ढे बनाए जाते हैं। जिसमें आसानी से पानी जमा होता रहता है। इससे 3-4 साल में जलस्तर काफी ऊपर आ जाता है। गर्मियों में ये छोटे गड्ढे तो सूख जाते हैं लेकिन तालाबों में लबालब पानी भरा रहता है।

इस प्रक्रिया से गिरते जलस्तर को किया जा सकता है दूर

मानसून का मौसम चल रहा है, इस मौसम में होने वाली झमाझम बारिश पेड़ पौधों से लेकर जीव जंतुओं सबके लिए अनुकूल होती है। बारिश के मौसम में पृथ्वी के सभी जंतुओं और वनस्पतियों का खूब विकास होता है। इस मौसम में अगर हम थोड़ी सक्रियता बरतें तो इसका फायदा सालों साल उठाया जा सकता है। बरसात के मौसम में अगर हम जल संरक्षण का काम करें तो भूमिगत जल को ऊपर उठाया जा सकता है। साथ ही साथ सालों साल पानी की कमी को दूर किया जा सकता है। लेकिन हर साल गिर रहे जलस्तर के बीच इंसान मोटर , समर्सिबल पंप, और इंजन लगाकर जमीन से पानी खींचकर अपना काम चला रहे हैं।

जलसंचयन के लिए कार्य न होने की वजह से बारिश का पानी नालियों के रास्ते नदियों में होते हुए समुद्र में मिल जाता है। वर्षा जल संरक्षण और वर्षा जल संचयन की तमाम तकनीकियां पूरे विश्व में उपलब्ध हैं, लेकिन इन तकनीकों का प्रयोग करने वालों की संख्या बेहद कम है। ऐसे प्रयोगों को बड़े स्तर पर बढ़ावा दिए जाने की आवश्यकता है। देश में जल संसाधन मंत्रालय भी पानी के विकास के लिए लगातार काम कर रहा है।

लाॅकडाउन में जंगल के तालाबों से मिली मदद

जैसे जैसे पेड़ बढ़ते हैं इन पेड़ों के बीच पानी के टैंकरों के आने की संभावना घटती जाती है। इसीलिए तालाब और हैंडपम्प की जरूरत होती है। पीपल बाबा की टीम के अहम सदस्य जसवीर मलिक बताते हैं कि कोरोना काल में जब लॉकडाउन लगा तो पानी के टैंकर बाहर से आने बंद हो गए और प्रचंड गर्मियों में जंगलों के बीच के तालाबों से ही पानी की आपूर्ति सुनिश्चित की गई।

उत्तर प्रदेश के जंगलों में बनाए 30 तालाब

पीपल बाबा देश के हर नागरिक को पर्यावरण संवर्धन कार्य से जोड़ने के लिए हरियाली क्रांति का आधार तैयार कर रहे हैं। पीपल बाबा के इस अभियान से देश के हर हिस्सों से लोग जुड़ रहे हैं। जल संरक्षण के सन्दर्भ में यह बात दीगर है कि पीपल बाबा ने उत्तर प्रदेश में जंगलों के विकास के लिए 30 तालाब बनाएं हैं। पिछले दशक में पीपल बाबा ने उत्तर प्रदेश में नॉएडा के सोरखा गाँव, ग्रेटर नॉएडा के मेंचा और लखनऊ के रहीमाबाद में 15-15 एकड़ के 3 विशाल जंगलों के विकास का कार्य कर रहे हैं। अबतक पूरे देश में पीपल बाबा के नेतृत्व में 2.1 करोड़ से ज्यादे पेड़ लगाए जा चुके हैं।

इनमें से सबसे ज्यादे पीपल के 1 करोड़ 27 लाख उसके बाद नीम, शीशम आदि के पेड़ हैं। पीपल बाबा के पेड़ लगाओ अभियान से अब तक 14500 स्वयंसेवक जुड़ चुके हैं और इनका कारवां देश के 18 राज्यों के 202 जिलों तक पहुँच चुका है। पीपल बाबा आने वाले समय देश के हर व्यक्ति को हरियाली क्रांति से जोड़कर पूरे देश को हरा भरा बनाना चाहते हैं। इसके लिए पीपल बाबा की टीम देश में अनेक अभियान चलाने जा रही है। इसी कड़ी में आगामी सितंबर महीने की 1 तारीख से 30 तारीख तक हरिद्वार के ऋषिकेश में पीपल बाबा नीम अभियान चलाने जा रहे हैं।