राज्यपाल अगर पीलीभीत आयीं होती तो ऐसी बदहाली न होती

उत्तर प्रदेश सरकार भले ही गड्ढा मुक्त सड़क होने के लाखों दावे करे लेकिन हकीकत में उत्तर प्रदेश की सड़कों में सिर्फ गड्ढे ही गड्ढे हैैं। बरेली से शुरू होकर जहानाबाद और सितारगंज को जाने वाले हरिद्वार हाईवे की दुर्दशा इसका जीता-जागता उदाहरण है। बरेली से पीलीभीत तक के मार्ग में सड़क कम गड्ढे अत्यधिक हैं। इन्हीं गड्ढों से कुछ दिनों पहले राज्यपाल आनंदीबेन पटेल को गुजरना था, लेकिन अचानक उनका कार्यक्रम बदलने के कारण गड्ढों को ऐसे ही छोड़ दिया गया और अब बारिश के कारण वह गड्ढे और भी बड़े हो गए। राज्यपाल को दुधवा से पीलीभीत आना था और वहां से लखनऊ जाने के लिए त्रिशूल एयरबेस तक आना था। बरेली और पीलीभीत के बीच हाईवे की हालत जैसे नहीं सुधरी है, वैसे ही उससे आगे सितारगंज तक बुरा हाल है।

सड़क की दुर्दशा ऐसे ही नहीं हुई। एनएचएआई वाले अपने हिसाब से काम करते रहे और बाकी अधिकारियों ने ध्यान ही नहीं दिया। बरेली-पीलीभीत-सितारगंज नेशनल हाईवे निर्माण करने वाली कंस्ट्रक्शन कंपनी एक साल पहले 60 फीसदी काम कराने के एवज में 75 फीसदी पेमेंट लेकर भाग गई। जिससे बाईपास और अप्सरा नदी पर ओवरब्रिज निर्माण अधूरा रह गया। घपले और लापरवाही को छिपाने के लिए अब एनएचएआई ने सरकार से 180 करोड़ रुपये का दोबारा बजट स्वीकृत कराया है। इस बजट से निर्माण के टेंडर 27 अगस्त को खुलेंगे।

यह हाईवे उत्तरप्रदेश को उत्तराखंड से जोड़ता है। हाईवे बरेली से वाया पीलीभीत- सितारगंज होते हुए हरिद्वार तक जाता है। फिलहाल यह सड़क जर्जर हालत में है। तमाम जगह सड़क पर गड्ढे हो चुके हैं। पीलीभीत से सितारगंज तक 74.46 लंबे हिस्से को टू लेन बनाने का एस्टीमेट केंद्रीय भूतल परिवहन मंत्रालय से 2014 में स्वीकृत कराया गया थ। निर्माण कार्य की जिम्मेदारी लखनऊ की विजय इन्फ्रा लिमिटेड को दी गई थी।

कंस्ट्रक्शन कंपनी को बरेली-पीलीभीत हाईवे से पीलीभीत-अमरिया मार्ग को जोडने वाला एक बाईपास, रेलवे क्रासिंग पर ओवरब्रिज और अप्सरा नदी पर पुल निर्माण कराना था। कंस्ट्रक्शन कंपनी ने 60 फीसदी काम भी पूरा नहीं किया। एनएचएआई से 279 करोड़ की लागत वाले प्रोजेक्ट में से 75 फीसदी पेमेंट भी करा लिया। इसके बाद कंपनी काम अधूरा छोड़कर भाग गई। नेशनल हाईवे के इस हिस्से का काम वर्ष 2016 तक पूरा होना था, मगर चार साल बीतने के बाद भी यह काम अधूरा पड़ा है।