पीलीभीत नगर पालिका ने पानी में बहाए 78 करोड़ रुपए

अपने अजब-गजब अंदाज को लेकर अक्सर चर्चा में रहने वाले उत्तर प्रदेश के पीलीभीत जिले की नगर पालिका की एक और फजीहत सामने आयी है। पीलीभीत शहर में सफाई व्यवस्था के नाम पर नगर पालिका ने 78 करोड़ रुपए का बजट पानी में बहा दिया है। जिसके बाद भी शहर से न कूड़ा हटा और न ही नालों की सफाई हुई है। शहर में अनेकों जगह गंदगी का अंबार लगा हुआ है। नगर पालिका ने पीलीभीत में हालात ऐसे बना दिए हैं कि अगर आप बिना मास्क के सड़कों पर निकल जाएं तो आपको बीमार होने से कोई नहीं बचा सकता। हाल ही में हुए स्वच्छता सर्वेक्षण 2020 में जिले की 259वीं रैंकिंग आयी है।

पीलीभीत नगर पालिका द्वारा सफाई करने का जिम्मा 180 स्थाई और 250 ठेका सफाई कर्मियों पर है। इन पर हर महीने नगर पालिका 65 लाख रुपए खर्च करती है। जिसमें 45 लाख स्थाई सफाई कर्मियों पर जबकि 16 लाख ठेका सफाई कर्मियों पर। वहीं 4 लाख गाड़ियों के डीजल पर खर्च कर दिया जाता है। लेकिन फिर भी शहर की सफाई व्यवस्था एकदम चैपट है। शहर के 49 मोहल्लों में 22 खुले कचरा घर है, जिसमें रोज 9 टन से ज्यादा कचरा जमा होता है जिसको शहर के किनारे खुले में डाल दिया जाता है।

पीलीभीत नगर पालिका आज तक शहर में एक वेस्ट मैनेजमेंट प्लांट नहीं लगवा पाई है। जिसके चलते शहर भर से निकला कूड़ा पीलीभीत शहर की देवहा और खखरा नदी के किनारे डाला दिया जाता है।

जिलाधिकारी पुलकित खरे का कहना है कि देश की स्वच्छता सर्वेक्षण में जो जिले की रैंकिंग आई है उसमें सुधार किया जायेगा। जिसको लेकर जिले के सभी ईओ से मिटिंग की जायेगी। विशेष अभियान चलाया जाएगा और लोगों को भी जागरुक किया जाएगा।