पीलीभीत : 12 दिनों में किसानों को साढ़े तीन करोड़ की लगाई चपत

सरकारी धान खरीद के शुरुआती 12 दिनों में माफिया पूरी तरह सिस्टम पर हावी हो चुके हैं। खाद्य विभाग के अधिकारियों से सांठगांठ के चलते अब तक सरकारी क्रय केंद्रों पर मात्र 22 हजार क्विंटल ही धान की खरीद हो सकी है, जबकि प्राइवेट आढ़तियों ने 61 हजार क्विंटल धान की खरीद सरकारी रेट से 600 रुपये कम में कर ली। मिल मालिक, माफिया और अफसरों की सांठगांठ से चलने वाले धान खरीद के इस खेल में अब तक किसानों को 3.5 करोड़ से ज्यादा की चपत लग चुकी है।
सरकारी धान खरीद में मिल मालिक, एजेंसियों से जुड़े अफसर और माफियाओं का गठजोड़ किसानों की छह महीने की मेहनत पर पानी फेरने में लगा है। धान खरीद में खेल का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि अब तक सरकारी क्रय केंद्रों की तुलना में आढ़तों पर तीन गुनी धान खरीद हो चुकी है। यानी किसान 61 हजार क्विंटल धान प्राइवेट आढ़तियों और मिल मालिकोंको 1150 से 1200 रुपये प्रति क्विंटल के भाव से बेच चुके हैं। अगर यही धान क्रय केंद्रों पर तय रेट से बिकता तो 3.5 करोड़ रुपये से ज्यादा की रकम किसानों की जेब में जाती। किसान की हाड़ तोड़ कमाई की यह रकम अब माफियाओं, दलालों और बिचौलियों की जेब में जाएगी। हर साल की तरह माफिया और सिस्टम साठगांठ से आढ़तों पर खरीदे गए धान को सरकारी खरीद में शामिल करके लक्ष्य परा लेता है। धान खरीद के 12 दिनों में ही माफिया 3.5 करोड़ से ज्यादा का खेल कर चुके हैं तो आने वाले दिनों में यह खेल कहां तक पहुंचेगा, इसका अंदाजा लगाया जा सकता है।