क्या हुआ जब सत्य पायलेट से परेशान होकर ब्रम्हा जी के पास पहुँचा

यह वो दौर था जब सत्य हर दिन परेशान हो रहा था, और एक दिन खीज खाकर सत्य प्रभु-प्रभु पुकारते ब्रम्हा जी की शरण में जा पहुँचा।

सत्य इतनी जोर से प्रभु-प्रभु पुकार रहा था कि सारा ब्रह्मलोक सत्य की त्राहिमाम से कांप उठा।

ब्रम्हा जी ने नेत्र खोले और कहा ‘‘पुत्र सत्य क्या समस्या है तुम्हें ….! इतने परेशान क्यों हो”

प्रभु….! आपको तो मेरी परेशानी की जरा भी फिक्र नहीं है और अब-जब पायलेट मेरी फिक्र कर रहा है तो आप क्यों अशोक गहलोत के साथ है???

क्यों आप पप्पू को पप्पू बने देखना नहीं चाहते।

‘‘वत्स इतना लोड न लो…! चिल रहो…! अगर चिल रहना नहीं आता तो दिग्गी राजा के पास जाकर थोड़ी ट्रेनिंग श्रेनिंग ले लो।

बेबस सत्य ने कहा प्रभु मुझे नरकलोक स्वीकार्य है लेकिन ऐसा उपहास कर मेरी मर्यादा भंग न करें।

तुमने फिर से लोड लेना शुरू कर दिया। परेशान न हो मैंने मैटर को संभालने के लिए मोटा भाई को भेज दिया है।

जाओ चिल करो अब कोई तुम्हें परेशान नहीं करेगा।

@आशीष विश्वकर्मा

नोट:- यह व्यग्य है इसे व्यग्य की तरह ही ले। किसी व्यक्ति और धर्म विशेष का उपहास करना हमारा मकसद नहीं है। इस व्यग्य में व्यक्त विचार / विश्लेषण लेखक के निजी हैं। यह जरूरी नहीं है कि मंथन न्यूज 24 लेखक से सहमत हो। इस लेख से जुड़े सभी दावे या आपत्ति के लिए सिर्फ लेखक ही जिम्मेदार हैं।