कोरोना के बीच स्कूल खुले, लेकिन 96 % पेरेंट्स बच्चों को नहीं भेजना चाहते स्कूल

अनलॉक-4 में केंद्र सरकार ने करीब 6 महीने बाद 9वीं से 12वीं तक के बच्चों के स्कूल खोल दिए हैं। स्कूल खुले लेकिन छात्रों की उपस्थिति न के बराबर रही। नौवीं से 12वीं कक्षा तक के विद्यार्थियों के मार्गदर्शन के लिए निजी स्कूल सोमवार से खुल गए। हालांकि, मिशनरी और सरकारी स्कूल अभी नहीं खोले गए हैं। ये स्कूल सरकार के आदेश का इंतजार कर रहे हैं। स्कूल खुलने पर 50 फीसदी शिक्षक और कर्मी आए। कोरोना के डर से अभिभावकों ने अपने बच्चों को नहीं भेजा।

स्कूलों में कोरोना वायरस से बचाव के तमाम इंतजाम दिखे। जो स्कूल खुले थे वहां छात्रों की उपस्थिति बहुत कम रही। एक निजी स्कूल के प्राचार्य ने बताया कि एक भी छात्र सोमवार को स्कूल नहीं आए, जबकि 50 फीसदी शिक्षक उपस्थित रहे। इंटरनेशनल स्कूल में एक भी छात्र नहीं पहुंचे।

भोपाल के द संस्कार वैली स्कूल की प्रिंसिपल शीला रघु, ने बताया कि हम 21 से बच्चों के लिए स्कूल नहीं खोले हैं। उनका कहना है कि हमने एक सर्वे कराया था, जिसमें 87 फीसदी बच्चों ने कहा कि हम ऑनलाइन पढ़ाई से खुश हैं। लेकिल हमने स्कूज में न्यू नॉर्मल गाइडलाइंस की सारी तैयारी है, लेकिन जब तक पैरेंट्स तैयार नहीं होंगे, तब तक बच्चों को स्कूल नहीं बुलाएंगे।

शिक्षकों को रोटेशन के आधार पर बुलाया जा रहा है। आधे शिक्षक ऑनलाइन क्लास के लिए घर में रहेंगे। वहीं, आधे शिक्षकों को स्कूल बुलाया जा रहा है। डीएवी से मिली जानकारी के अनुसार शिक्षकों को अल्टरनेट बुलाया जा रहा है जो शिक्षक स्कूल नहीं आ रहे है वो ऑनलाइन क्लास लेंगे।