24×7 मरीजों की मदद में जुटी “टीम सहयोग”

फोन को फुल वॉल्यूम पर रखकर सोते हैं, ताकि जरूरतमंद का फोन आते ही नींद खुल जाए।

देशभर में कोरोना महामारी की दूसरी लहर से रोजाना बड़ी संख्या में लोग संक्रमित हो रहे हैं। संक्रमण अब गांवों तक फैल चुका है जिसके चलते अस्पतालों में बेड एवं ऑक्सीजन उपलब्धता की समस्या आ रही है। लोग सोशल मीडिया पर मदद की गुहार लगा रहे हैं। ऐसे में प्रदेश के प्रतिभाशाली युवाओं द्वारा मदद के लिए बनाया गया ‘सहयोग’ समूह लोगों का विश्वास बन रहा है। सहयोग में प्रदेशभर से 200 से अधिक युवा जुड़े हैं जो अस्पताल में बेड, ऑक्सीजन, प्लाजमा, ब्लड, दवाइयों एवं भोजन की व्यवस्था कराते हैं।

सहयोग के कोऑर्डिनेटर शुभम चौहान एवं अभिलाष ठाकुर ने बताया ‘सहयोग टीम’ में इंदौर, ग्वालियर, जबलपुर, सागर समेत प्रदेश के विभिन्न जिलों से युवा जुड़े हैं, जो 24 घंटे सक्रिय रहकर व्हाट्सएप ग्रुप के माध्यम से लोगों की मदद करते हैं। समूह के सदस्य दिन में तो तन्मयता से काम करते हैं लेकिन रात में भी फोन को फुल वॉल्यूम पर रखकर सोते हैं ताकि किसी जरूरतमंद मरीज के परिजन का फोन आते ही नींद खुल जाए।

सहयोग के सदस्य यश चतुर्वेदी ने बताया कि कुछ केस हमें अंदर तक झकझोर देते हैं। इंदौर के एक परिवार में माँ की मृत्यु हो गई थी, बेटा विदेश में था और बेटी दामाद आईसीयू में थे। तब उनके किसी रिश्तेदार ने सोशल मीडिया ने नंबर निकाल कर मुझे सूचना दी, मैंने इंदौर कमिश्नर से संपर्क किया जिसके एक घंटे के अंदर उनका अंतिम संस्कार किया गया। इसके अलावा एक केस में मरीज के परिजनों पर सीटी स्कैन के पैसे नहीं थे। तब हम तीन मित्रों ने मिलकर उनके सहयोग के लिए 10 हजार रूपये दिए थे – यश चतुर्वेदी, सहयोग।

सहयोग के साथी एवं प्लाजमा डोनर प्रसन्न शुक्ला ने बताया कि मैं वैक्सीनेशन सेंटर पर लोगों की मदद करता हूँ। मैं भी पिछले महीने कोविड पॉजिटिव हुआ था, तभी प्लाजमा डोनेट करने का मन बना लिया था। मेरा एंटीबॉडी काउंट 175 आया जिसके बाद मैंने प्लाजमा डोनेट किया। मुझे खुशी है कि जिस मरीज को मेरा प्लाजमा दिया गया वह स्वस्थ होकर घर जा चुके हैं। इससे अधिक जीवन की सार्थकता और क्या होगी। – प्रसन्न शुक्ला, सहयोग।

प्रशासनिक परीक्षाओं की तैयारी कर रहीं तपस्या ब्रह्मपुरिया ने बताया कि कोरोना से संक्रमित लोगों के परिजनों की हालत दुखी करती थी। इसलिए सहयोग के साथ काम करने की ठानी। मैं अपनी टीम के साथ ऑक्सीजन बेड, आइसीयू, वेंटीलेटर के लिए अस्पताल से समन्वय कर मरीज की व्यवस्था कराते हैं। कई बार हमने एक दिन में 20 से अधिक लोगों को बेड उपलब्ध कराएं। उनके चेहरे की खुशी देखकर थकान दूर हो जाती है – तपस्या ब्रह्मपुरिया, सहयोग।

सहयोग में मेडीकल आवश्यकताओं की पूर्ति कराने वाले आदर्श मिश्रा बताते हैं कि मेरी टीम मरीज के परिजन से बात कर डॉ का पर्चा मंगाती है। इसके बाद हम भोपाल, इंदौर एवं अन्य बड़े शहरों में कौन सी दवा किस मेडिकल पर उपलब्ध है इस बात की जानकारी परिजन को उपलब्ध कराते हैं। इससे मरीज के परिजनों का समय भी बचता है, और दवा भी आसानी से उपलब्ध हो जाती है – आदर्श मिश्रा, सहयोग।

सहयोग के गगन परमार बताते हैं कि कोरोना काल में लोग ब्लड डोनेट करने से डर रहे हैं, उनको भय रहता है कि कहीं डोनेशन के दौरान वह संक्रमित न हो जाएं। यही प्लाजमा केस में भी होता है। तब हमारी टीम डोनर से बात कर उसे ब्लड या प्लाजमा दान के लिए मनाते हैं। कई बार डोनर हाँ कहने के बाद भी नहीं जाते, तब हम दूसरे डोनर की तलाश करते हैं – गगन परमार, सहयोग।