जानिए क्या है टाइम कैप्सूल जिसे राम मंदिर की नींव में दबाया जा सकता है

राम मंदिर तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के सदस्य कामेश्वर चौपाल ने दावा किया है कि अयोध्या में बन रहे राम मंदिर की नींव में एक टाइम कैप्सूल यानी काल पात्र डालने का फैसला किया गया है। इस टाइम कैप्सूल के माध्यम से राम मंदिर के इतिहास को सुरक्षित रखने का प्रयास किया जा रहा है। हालांकि, राम जन्मभूमि ट्रस्ट के एक सदस्य का कहना है कि मंदिर के नीचे टाइम कैप्सूल नहीं डाला जाएगा। यह पहला मौका नहीं है, जब भारत में किसी स्थान पर टाइम कैप्सूल स्थापित करने की बात हो रही है। आईए जानते हैं कि विश्व और भारत में इसका इस्तेमाल कब-कब हुआ है ?

टाइम कैप्सूल एक कंटेनर की तरह होता है। यह विशेष प्रकार की सामग्री से बनाया जाता है। टाइम कैप्सूल को जमीन में काफी गहराई में दफना दिया जाता है। यह सभी मौसम में एक जैसा बना रहता है। इस पर किसी भी प्रकार का केमिकल रिएक्शन नहीं होता। इसलिए यह कभी सड़ता-गलता नहीं है। इसे दफनाने का मकसद होता है किसी समाज, किसी खास वक्त, किसी स्थान के इतिहास को सुरक्षित रखना।

टाइम कैप्सूल का अतीत सैकड़ों वर्ष पुराना है। साल 2017 को बर्गोस में करीब 400 साल पुराना टाइम कैप्सूल मिला था। यह टाइम कैप्सूल ईसा मसीह की मूर्ति के रूप में था। मूर्ति के अंदर एक दस्तावेज था, जिसमें साल 1777 के आसपास की आर्थिक, राजनीतिक और सांस्कृतिक सूचनाएं दर्ज थीं। बीसवीं सदी में अमेरिका के कई शोध संस्थानों ने टाइम कैप्सूल के माध्यम से विभिन्न जानकारियों को जमीन के नीचे दबाया गया था।

आजादी के 25 साल बाद तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने एक राष्ट्र के रूप में 25 वर्षों की उपलब्धियों और संघर्षों को बयां करने के लिए लाल किले में एक टाइम कैप्सूल डलवाया था।

2010 में आईआईटी कानपुर ने अपने 50 साल पूरे होने के मौके पर टाइम कैप्सूल को जमीन के अंदर दबाया था। इसे तत्कालीन राष्ट्रपति प्रतिभा देवी सिंह पाटिल ने जमीन के अंदर दफन किया था। इसका उद्देश्य था कि भले ही दुनिया तबाह हो जाए लेकिन आईआईटी कानपुर का इतिहास सुरक्षित रहे।


टाइम कैप्सूल अधिकतर विवादों को जन्म देता है। राम मंदिर के मामले में भी यही देखा जा रहा है। यह खबर आने के बाद से सोशल मीडिया पर लोगों ने सवाल उठाना शुरू कर दिया है कि इस टाइम कैप्सूल में क्या डाला जाना उचित रहेगा। जिसके बाद राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय ने टाइम कैप्सूल से जुड़ी खबरों को मात्र अफवाह बताया है। अब देखना यह होगा कि क्या वास्तव में राम जन्मभूमि में टाइम कैप्सूल को दबाया जाएगा या नहीं।