विकास तुम्हें मरना ही था

@श्याम मिश्रा

कानपुर वाले गैंगस्टर विकास दुबे का मरना तय था। एनकाउंटर में न भी मारा जाता तो भी अदालत फांसी से कम सजा न सुनाती। विकास दुबे तुम्हारे 60 से अधिक आपराधिक मामलों को नजरअंदाज भी कर दिया जाता तो भी आठ पुलिसकर्मियों की हत्या में तुम मौत से नहीं बच सकते थे। तुम एक अपराधी थे। तुम्हारी मौत से हमें ही क्या, किसी को भी कतई दुख नहीं है, लेकिन तुम्हारी मौत के तरीके से हमें घोर नाराजगी है। दो दिन पूर्व तुम्हारे एक दोस्त का एनकाउंटर इस बात पर कर दिया जाता है कि वह पुलिस का हथियार छीनकर भाग रहा था। धन्य है हमारा पुलिस तंत्र। हथकड़ी लगाए एक अपराधी पुलिस का हथियार छीन लेता है और पुलिस का काफिला सिवाय गोली चलाने के कुछ भी नहीं कर पाता। ऐसा ही कुछ तुम्हारे साथ भी हुआ विकास। समय से पहले तुम्हारी मौत न लिखी होती तो पुलिस की गाड़ी न पलटती। काफिले के पीछे चल रही मीडिया को घटना स्थल से कुछ दूर पहले न रोक दिया गया होता। गाड़ी पलटने के बाद हथकड़ी लगी होने पर भी तुम इतने पुलिस वालों से संघर्ष न करते। विकास को गैंगस्टर कहने में हमें शर्म आ रही है। तुम पुलिस पर फायरिंग करने चले थे, लेकिन तुम्हे पिस्टल चलानी भी नहीं आई। भगवान का लाख-लाख शुक्र है जो विकास के हमले में हमारी पुलिस को कोई नुकसान नहीं हुआ। हां एक बात पर विकास तुम पर नाज है। दो पुलिसकर्मी के बीच में हथकड़ी पहने बैठे तुम और गाड़ी के पलटने के बाद भी तुमने पुलिसकर्मियों को परास्त कर दिया। विकास तुम्हें भागना ही था तो महाकाल के दरबार में अपनी गिरफ्तारी क्यों कराई। विकास तुम्हारा दुर्भाग्य ही तो था कि घटना वाले दिन से तीन दिन तक उत्तर प्रदेश में लॉकडाउन किया गया है, नहीं तो कोई बचाने जरूर आ जाता। अपराधी विकास तुम्हें समय से पहले न जाना होता तो एनवक्त पर पुलिस चेकिंग न शुरू हो जाती। विकास तुमने जैसा किया था, तुम्हें वैसा मिला। अखर तो सिर्फ यह रहा है कि प्रशासन का तरीका न्यायसंगत नहीं था। तुम्हारे जाने से कुछ खाकी और खादी वालों को राहत मिली होगी। अपराधी जो तुम थे। वैसे अभी तक तुम आरोपी थे। न्यायालय से अपराधी सिद्ध नहीं हुए थे। ऐसे कई आरोपी संसद और विधानसभा में बैठकर सरकार चला रहे हैं।

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