तीरथ सिंह रावत के बयान पर आखिर इतना बवाल क्यों ? – सुयश मिश्रा

संस्कार और सलवार-कमीज का गहरा नाता है। हमारे यहां लड़कियों की तमीज और तहजीब उनके कपड़ों से ही मापी जाती है। अधिकांश स्थानों पर एक प्रथा यह विकसित हो गयी है किअगर किसी लड़की ने सलवार-कमीज पहन रखी है तो वह एक गुणी और सती-सावित्री लड़की है, यह कई पहलुओं पर सत्य भी सावित होती है परंतु आज हमारे देश में पहनावे पर आए दिन बाद-विवाद प्रारंभ हो जाता है। हमारे देश में नेताओं और टॉप रैंक के ऑफिसर्स से लेकर सड़क पर खडे़ आम नागरिक की भी लड़कियों के प्रति यही सीख दी जाती है। इसी लिस्ट में अब उत्तराखंड के नए नवेले मुख्यमंत्री तीरथ सिंह रावत भी आ गए हैं । उन्होंने मुख्यमंत्री बनने के कुछ समय बाद ही स्त्रियों के पहनावे पर अपनी राय प्रकट कर दी जिसके बाद संपूर्ण देश में अधिकांश नारियां क्रोधित हो उठीं और मुख्यमंत्री साहब का विरोध करने लगीं लेकिन रावण साहब का पूर्ण रूप से विरोध करने से पूर्व एक बार इस विषय पर विचार भी किया जा सकता था। अगर मुख्यमंत्री की बात को गौर किया जाए तो हो सकता है भारत की अधिकांश जनता उनसे सहमत होती ।

लड़कियों को मुख्यमंत्री साहब की बात इतनी खराब लग गयी कि देश की अनेकों स्त्रियों ने अपनी फ़टी हुई जीन्स पहनकर फोटो सोशल मीडिया पर प्रसारित कर दिए। अब यहां विचारणीय बात यह है कि सभी लड़कियों ने ऐसा किया कि सिर्फ एक विशेष वर्ग की लड़कियों ने यह कार्य किया। क्योंकि जो स्त्रियां मुख्य रूप से विरोध कर रहीं हैं उनमें से ज्यादातर उच्च वर्ग की हैं वाकी मोहतरमाएं तो सिर्फ उच्च वर्ग की नारी का अनुसरण कर रहीं हैं। जो लड़कियां अधिक विरोध कर रहीं हैं वे लड़कियां उन घरों की हैं जो देर रात तक पब से लौटती हैं, वाचमैन गेट खोलता है़, उन्हें बॉयफ्रेंड हग करता है फिर वे अपने कमरे मे जाकर सो जाती हैं । जिनके माँ बाप को यह भी ज्ञात नहीं होता है उनकी बेटी कब घर लौटी । वे लड़कियां फटी जींस पहने या फटा टॉप, उनके परिवार बालों को इससे कोई फर्क नहीं पड़ता!

लेकिन इन्ही फटी जींस वाली लडकियों की नकल उतारकर जब मध्यमवर्गीय लड़कियां आधुनिक बनने की कोशिश करती हैं तो माँ बाप का सिर शर्म से झुक जाता है। ऐसी लड़कियां समाज के प्रति अभिशाप हैं। कौन ऐसा माँ बाप होगा जो अपनी लड़की का अंग प्रदर्शन देखकर खुश होता होगा? एक तरफ विदेशी भारतीय संस्कृति को अपना रहे हैं वहीं दूसरी तरफ भारतीय लड़कियां विदेशी सभ्यता को अपना कर भारत की संस्कृति का पतन कर रही हैं।

हर धर्म में कपड़े पहनने का एक विशेष सलीका वर्णित किया गया है। आज विपक्ष के जो नेता राजनीति के लिए सीएम का विरोध कर रहें हैं, वे पहले अपनी बेटी का उसी फटी जींस में फोटो सोशल मीडीया पर डाले फिर विरोध जताए, इसके पश्चात ही देश के समक्ष विरोध की हकीकत सामने आ सकेगी।
रावत का विरोध सिर्फ इसलिए नहीं होना चाहिए की वे भाजपा के मुुख्यमंत्री हैं । उन्होंनेे सच ही कहा एनजीओ चलाकर बच्चों के बीच जाने वाली फटी जींस की लड़की कौन सा संस्कार देगी बच्चों को यह चिंताजनक है। क्योंकि यह एनजीओ में बच्चे शिक्षा लेने के लिए आते हैं उनके बेहतर भविष्य का निर्माण करने के लिए आते हैं एनजीओ में उच्च स्तर के बच्चे कदापि नहीं आते जो बार-पब में जाएं। बल्कि यह बच्चे मध्यमवर्गीय और निम्नवर्गीय हैं । जो लोग रावत का विरोध कर रहे हैं। क्या वे अपनी बेटी को इतनी आजादी देने के पक्ष मेंं हैं?

सुयश मिश्रा

इस लेख में व्यक्त विचार/विश्लेषण लेखक के निजी हैं। यह जरूरी नहीं है कि मंथन न्यूज़ 24 लेखक से सहमत हो । इस लेख से जुड़े सभी दावे या आपत्ति के लिए सिर्फ लेखक ही जिम्मेदार हैं ।